अम्ल , क्षारक एवं लवण- Bihar Board Class 10th Chemistry Subjective Question-answer 2023

लघु उत्तरीय प्रश्न 

  1. सूचक क्या है ? एक सूचक का नाम लिखें | 

उत्तर -वैसे रंजक ( dyes ) , जिनका अम्ल और क्षारक द्वारा रंग परिवर्तन होता है , को सूचक ( indicator ) कहा जाता है | सूचक का उपयोग अम्ल एवं क्षारक की जाँच के लिए किया जाता है | इसका उपयोग मुख्य रूप से अम्ल एवं क्षारक एवं क्षारक की अभिद्रिया , अर्थात उदासीनीकरण अभिक्रिया के समापन को दर्शाने के लिए किया जाता है | 

      2. क्षारक एवं क्षार में क्या अंतर है ? 

उत्तर – वैसे पदार्थ , जिनका जलीय विलयन स्वाद में कड़वा होता है , लाल लिटमस प को नीला कर देता है तथा अम्त्रल से अभिक्रिया कर लवण बनाता है , क्षारक कहलाते है | ये सामान्यत: धातु के ऑक्साइड या हाइड्रोऑक्साइड होता है | 

         वे क्षारक जो जल में  विलेय होते हैं , क्षार कहलाते हैं | सोडियम हाइड्रोऑक्साइड जल में विलेय होता है , अतः यह क्षार कहलाता है | किन्तु , सभी क्षारक जल में विलेय नहीं होते हैं | कॉपर हाइड्रोऑक्साइड जल में अविलेय है , अतः इसे क्षार नहीं कहा जा सकता है | इसलिए हम कह सकते हैं कि सभी क्षारक क्षार नहीं हो सकते , क्योंकि सभी क्षारक जल में विलेय नहीं होते हैं | 

     3. अम्ल क्या है ? कोई दो उदहारण दें | अम्ल का एक सूचक पर प्रभाव बतएँ | 

उत्तर – अम्ल जल में विलयशील वे पदार्थ हैं जिनका जलीय स्वाद में खट्टा होता है , वह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है तथा धतू से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है | 

उदहारण – कच्चा आम , टमाटर , कच्चा आंगुर आदि अम्ल की उपस्थिति के कारण स्वाद में खट्टे होते हैं | 

अम्ल का उदहारण – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HCl ) एवं नइट्रिक अम्ल ( HNO

सूचक पर प्रभाव – अम्ल मेथिल ऑरेंज मेथिल पीला से गुलाबी बना देता है | 

     4. विरंजक चूर्ण क्या है ? इसका रासायनिक नाम , सूत्र एवं उपयोग लिखें | 

उत्तर – विरंजक चूर्ण एक श्वेत चूर्ण है जिससे क्लोरीन की गंध बराबर निकलती रहती है | इसका रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड या चुना का क्लोराइड है | इसका सूत्र Ca ( OCl )Cl या CaOCl2   है | 

          इसका उपयोग ( i ) विरंजन में , ( ii ) विसंक्रामक ( disinfectant ) के रूप में और ( iii ) पीने के जल को शुद्ध करने में होता है | 

    5. धोबन सोडा का रासायनिक नाम क्या है ? सॉल्वे विधि से धोबन सोडा के उप्तादन में प्रयुक्त होनेवाली कच्ची सामग्री क्या – क्या हैं ? 

उत्तर – धोबन सोडा का रासायनिक नाम सोडियम कर्बोनिट ( Na CO )है | चूंकि इसके एक अणु में जल के 10 अणु रहते हैं , अतः इसे सोडियम कार्बोनिट डेकाहाइ    ( Na CO .  10 H 2 O ) भी कहा जाता है | धोबन सोडा के उत्पादन की सॉल्वे विधि में प्रयुक्त कच्ची सामग्री हैं – सोडियम क्लोराइड का सांद्र जलीय विलयन ( ब्राइन ) , अमोनिया ( NH ) और चुना – पत्थर ( CaCO )| 

    6. प्रबल भस्म तथा दुर्बल भस्म में भेद बतायें | 

उत्तर – प्रबल भस्म तथा दुर्बल भस्म के भेद हैं – 

दुर्बल भस्म प्रबल भस्म
  1. वे भस्म जो जलीय विलयन में सिर्फ अंशत:आयनिक होकर कम मात्रा में हाइड्रोक्साइड आयन ( OH) प्रदान करते हैं ,दुर्बल भस्म या क्षार कहलाते हैं | 
  1. वे भस्म जो जलीय विलयन में लगभग पूर्णत:आयनित होकर काफी मात्रा में हाइड्रोक्साइड आयन (OH )प्रदान करते हैं |  
     ii. NH4OH,[Ca(OH)2] , [ Mg(OH)2] दुर्बल भस्म हैं |         ii. NaOH , KOH प्रबल भस्म हैं |  

     7. सुंचक क्या है ? 

उत्तर – वैसा पदार्थ जो अपने रंग परिवर्तन के द्वारा पर\दार्थ की प्रकृति अम्लीय या क्षारीय या उदासीन होने की सुचाना देता है उसे सूचक कहते हैं | 

         जैसे – ( i ) मेथिल ऑरेंज , ( ii ) फिनॉल्फथेलिन |   

     8. pH स्केल किसे कहते हैं ? 

उत्तर -किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है जिसे pH स्केल कहते हैं | 

      9. दंत क्षय में pH के महत्त्व का वर्णन कीजिए |  

उत्तर – मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय आरंभ हो जाता है | दाँतो का इनैमल कैल्सियम फॉस्फेट का बना होता है, जो शारीर का सबसे कठोर पदार्थ है |  यह जल में नहीं घुलता किंतु मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर यह संक्षारित हो जाता है | मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया , भोजन के पश्चात मुँह में अवशिष्ट शर्करा एवं खाद्द पदार्थो को निम्नीकरण करके अम्ल उप्तन्न करते हैं | भोजन के बाद मुँह साफ करने से इससे बचा जा सकता है | मुँह को साफ करने के लिए क्षारकीय दांत – मंजन का उपयोग करने से अम्ल की आधिक मात्रा को उदासीन किया जा सकता है | फलत: दाँत के क्षय को रोका जा सकता है | 

     10 . साधारण नमक के उपायोंग लिखिए | 

उत्तर – 

  1. नमक हमारे भोजन का अनिवार्य भाग है | 
  2. यह अनेक भोज्य पदार्थो के सुरक्षित रखने में काम आता है | 
  3. यह साबुन उद्दोग , पॉटरी आदि में प्रयुक्त होता है | 
  4. यह हिमकारी मिश्रण बनाने में प्रयुक्त होता है | 
  5. इसका उपयोग धोबन सोडा , विरंजक चूर्ण , कास्टिक सोडा , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मीठा सोडा आदि बनाने में किया जाता है | 

                                                                                                                                                             दीर्ध उत्तरीय प्रश्न                    

 

      1. दैनिक जीवन में pH का महत्त्व बतएँ | 

उत्तर – pH का हमारे दैनिक जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है –

  1. मानव और जंतु जगत में – हमारे शारीर की अधिकांश क्रियाएँ 7.0 से 7.8 pH परास के बिच काम करती हैं | हम इसी संकीर्ण परास में ही जीवित रह सकते हैं | हमारे रक्त , आँसुओं , लार आदि का pH लगभग 7.4 होता है | यदि यह 7.0 से कम हो जाता है या 7.8 से बढ़ जाता है तो जीवन असंभव – सा हो जाता है | वर्षा के जल से pH का मान जब 7 से कम होकर 5.6 हो जाता है तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं | अम्लीय वर्षा का जल जब नदियों में बहता है तो नादि के जल का pH का मान कम हो जाता है जिस कारण जलीय जीवधारियों का जीवन कठिन हो जाता  है | 
  2. पेड़ पौधों के लिए – पेड़ – पौधों की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए मिट्टी के pH परस की विशिषता बनी रहनी चाहिए | यदि यह अधिक अम्लीय या क्षारीय हो जाए तो उपज पर कुप्रभाव पड़ता है | 
  3. पाचन – तंत्र – हमारे पेट में HCI उत्पन्न होता रहता है जो हमें बिना हानि पहुँचाए भोजन के पाचन में सहायक होता है | अपच की स्तिथि में इसमे अम्ल की मात्रा अधिक बनाने लगाती है जिस कारण पट में दर्द और जलन अनुभव होता है | इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए एटैसिड जैसे क्षारकों का प्रयोग करना पड़ता है | इसके किए प्रायः मिल्क ऑफ़ मैग्नीशियम जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग कारन आवश्यक हो जाता है | 
  4. दांत – क्षय – हमारे मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतो का क्षय शुरू हो जाता है | हमारे दाँत कैल्सियम फॉस्फेट से बने होते हैं जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है | यह जल में नहीं घुलता पर मुँह की pH का 5.5 से कम होने पर यह नष्ट होने लगता है | मुँह में उपस्थित जीवाणु , अवशिष्ट शर्करा और खाद्द पदार्थो के निम्नीकरण से अम्ल उप्तन्न होते हैं | इनसे छुटकारा पाने के लिए क्षारकीय दांत – मजन का प्रयोग की जाना चाहिए | इससे अम्ल की अधिकता उदासीन हो जाते है और दांत क्षय से रोके जा सकते हैं | 
  5. जीव – जन्तुओं के डंक से रक्षा – जब जीव – जंतु  कभी डंक मर देते हैं वे हमारे शारीर में विशेष प्रकार के अम्ल छोड़ देते हैं | मधुमक्खी , भिरंड , चींटी आदि मेथैनॉइक अम्ल हमरे शरीर में डंक के माध्यम से पहूँचा देते हैं | इससे उत्पन्न पीड़ा से मुख्य के लिए डंक मरे गए अंग पर बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक का प्रयोग करना चाहिए | 
  6. विशेष पौधों से रक्षा – नेटल ( Nettle ) पौधे के पत्तो पर डंकनुमा बाल होते हैं | उन्हें छू जाने से डंक जैसा दर्द होता है | इन बातों से मेथैनॉइक अम्ल का स्राव होता है जो दर्द का कारण बनता है | पारंपरिक तौर पर इस पीड़ा मुक्ति डॉक पौधे की पत्तियों को डंक वाले स्थान पर रगड़ कर पाई जाती है |    

 

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