आवर्त सारणी ( Periodic Table )- Class 10th science notes in Hindi

प्रारंभ में बहुत कम तत्व ज्ञात थें | इसलिए हर एक का अध्ययन करने में कठिनाई नहीं होती थी | लेकिन आधुनिक समय में 118 तत्व ज्ञात है | इसलिए हर एक का अध्ययन करने मे कठिनाई होगी | इसलिए तत्वों को उनके समानता और असमानता के आधार पर वर्गीकरण करने से गुणों को सरलता से समझा जा सकता है | 

तत्वों के वर्गीकरण से लाभ – 

  1.  तत्वों के गुणों का अध्ययन नियमित तरीके से किया जा सकता है |
  2. सभी तत्वों के गुणों को अलग-अलग अध्ययन करने की आवयकता नहीं होती है |
  3. किसी समूह के तत्वों के गुणों में होनेवाले क्रमिक परिवर्तन को समझाना आसान हो जाता है |
  4. इससे विभिन्न समूहों के तत्वों के पारस्परिक संबंध की जानकारी प्राप्त की जा सकती है | 

तत्वों के वर्गीकरण के प्रारंभिक प्रयास –

1.धातु और अधातु में वर्गीकरण ( Classification into metals and nonmetals )

           सर्वप्रथम 18वीं शताब्दी में लभ्वाजे के तत्वों का वर्गीकरण धातु और अधातु में किया उनेक अनुसार, कुछ गुण सभी धातुओं में समान रूप से पाए जाते है | इसी प्रकार अधातुओं में भी कुछ गुण समान रूप से पाए जाते हैं | 

दोष – 

  1. यह वर्गीकरण इतना साधारण है कि उसके आधार पर तत्वों के गुणों का समुचित अध्ययन नहीं किया जा सकता है | 
  2. यह वर्गीकरण बहुत सी धातुओं के बीच विभिन्नता की व्याख्या नहीं कर पाता है | 

2. संयोजकता के आधार पर वर्गीकरण ( Classification on the basis of connectivity ) – कुछ वैज्ञानिकों ने तत्वों का वर्गीकरण उनके संयोजकता के आधार पर किया | 

दोष – 

  1. बहुत से तत्वों के संयोजकता परिवर्तनशील होती है | जिससे उन तत्वों का वर्गीकरण संयोजकता के आधार पर संभव नहीं है | 
  2. एक संयोजकता वाले तत्वों के गुण भिन्न-भिन्न होते हैं | 

3. डोबरेनर का त्रियक ( Dobereiner’s triad ) – 19वीं शताब्दी के जर्मनी के रसायन जॉन डोबरेनर का त्रियक नियम कहते हैं | त्रियक के तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाने पर मध्यवर्ती तत्व का परमाणु द्रव्यमान किनारे वाले शेष दोनों तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों का औसत होता है | 

वर्ग 1  वर्ग 2  वर्ग 3 
कैल्सियम 40  लिथियम 7  क्लोरीन 35.5 
स्ट्रॉशियम 87⋅5   सोडियम 23  ब्रोमीन 80 
बेरियम 137  पोटैशियम 39  आयोडीन 127 

त्रियक की विशेषताएँ – 

  1. इसमें तत्वों की क्रमबद्धता पाई जाती है | 
  2. यह तत्वों के परमाणु द्रव्यमान और उनके गुणों में एक संबंध स्थापित करता है | 

दोष – 

  1. इसका सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें तत्वों को सम्मिलित नहीं किया जा सकता | 
  2. इससे तत्वों के सिर्फ परमाणु द्रव्यमान का पता चलता है | 

4. न्यूलैड्स का अष्टक नियम (  Newlad’s Octet rule ) – 

     1865 में अंग्रेजी रसायन जॉन न्यूलैड्स ने तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में एक वर्गीकरण प्रस्तुत किया जिसे न्यूलैड्स का अष्टक नियम कहते हैं | इसके अनुसार, यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाया जाए तो किसी भी तत्व से प्रारंभ करने पर आठवे तत्व के गुण पहले तत्व के गुणों के समान होते हैं | जैसा कि संगीत का आठवॉ स्वर पहले स्वर समान होता है | 

सा  रे  ग  म  प  ध  नी 
H Li Be B C N O
F Na Mg Al Si P S

दोष – 

  1. यह नियम हल्के तत्वों के लिए लागू होता है क्योंकि कैल्सियम के बाद प्रत्येक आठवें तत्व के गुण प्रथम तत्व के गुण से बिल्कुल भिन्न होते है | 
  2. न्यूलैड्स का मानना था कि प्राकृतिक में 56 तत्व ही मौजूद है और आगे चलकर नये तत्वों का अविष्कार नहीं होगा | किंतु यह अनुमान गलत हुआ क्योंकि हमलोग जानते हैं कि अभी तक प्राकृतिक में 118 तत्व की प्राप्ति हुई है | 
  3. न्यूलैड्स ने कुछ असंदृश गुण वाले तत्वों को एक ही स्तर में रखा | 
  4. अक्रिय गैसों का अविष्कार होने के बाद नवम् प्रथम तत्व के समान गुण वाला होता है न आठवें | 

 

5. मेंडलिव का आवर्त नियम ( Mendeleev’s periodic law ) – 1869 में रुसी रसायनज्ञ दमित्री मेंडलिव ने तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों का अध्ययन करके तत्वों के वर्गाकरण की गई प्रणाली विकसित की |

तत्वों के गुणों के क्रमिक परिवर्तन होता है | तत्वों की एक निश्चित संख्या के बाद लगभग समान गुण वाले तत्व पाए जाते हैं इस गुणों के आधार पर मेंडलिव ने एक नियम प्रस्तुत किया जिसे मेंडलिव का आवर्त नियम कहते हैं जिसके अनुसार – यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाया जाए वो एक निश्चित संख्या के बाद समान गुण वाले तत्व पाए जाते हैं | 

मेंडलिव की आवर्त सारणी की विशेषताएँ –

  1. मेंडलिव के समय में कुल 63 तत्व ज्ञात थे | जिन तत्वों का वर्गीकरण मेंडलिव ने उनके परमाणु द्रव्यमानों के आधार पर किया | 
  2. आवर्त सारणी में उदय स्तंभ वर्ग कहलाते हैं जो 1 से 8 तक होते हैं वर्ग एक से सात में दो उपवर्ग A और B है किंतु वर्ग 8 में तीन उपवर्ग है उत्कृष्ट गैसों के लिए एक अन्य वर्ग 0 रखा |

    वर्ग →

    आवर्त ↓

    I II III IV V VI VII VIII
    1 H  (1)              
    2 Li  (7) Be  (9.4) B  (11) C  (12) N  (14) O  (16) F  (19)  
    3 Na  (23) Mg  (24) Al  (23.7) Si  (28) P  (31) S  (32) Cl   (35.5)  
    4 K  (39) Ca  (40) ?  (44) Ti  (48) V  (51) Cr  (52) Mn  (55) Fe(56)  Co(59)  Ni(59)  Cu(63)
    5 Cu  (63) Zn  (65) ?  (68) ?  (72) As  (75) Se  (78) Br  (80)  
    6 Rb  (85) Sr  (87) Yt  (88) Zr  (90) Nb  (95) Mo  (96) ? (100) Ru(104)  Rh(104)  Pb(106)  Ag(108)
    7 Ag  (108) Cd  (112) In  (113) Sn  (118) Sb  (122) Te  (125) I  (127)  
    8 Cs  (133) Ba  (137) Di  (138) Ce  (140) ? ? ? ?
    9 ? ? ?   ? ? ?  
    10 ? ? Er  (178) La  (180) Ta  (182) W  (184) ? Os(195)  Ir(197)  Pt(198)  Au(199)
    11 Au  (199) Hg  (200) Tl  (204) Pb  (207) Bi  (208) ? ?  
    12 ? ? ? Th  (231) ? U  (240)    

मेंडलिव की सारणी की उपयोगिताएँ –

  1. इस सारणी की सहायता से तत्वों और उसके गुणों का अध्ययन करना काफी आसान हो गया | 
  2. मेंडलिव ने आर्वत सारणी तैयार करते समय कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिए | 
  3. मेंडलिव ने गलत परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों में सुधार कर उनका सही परमाणु द्रव्यमान अपनी आवर्त सारणी में लिखा | 
  4. आवर्त सारणी के किसी वर्ग विशेष के सभी तत्वों की संयोजकता एक ही होती है किंतु आवर्त में क्रमित रूप से परिवर्तन होता है | 

मेंडलिव की आवर्त सारणी के दोष – 

  1. आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान अनिर्णित है | 
  2. लैथेनइड्स और ऐक्टिनइड्स समूहों में प्रत्येक में 14 तत्वों को रखा है जो वर्ग , B के 6 से 7 के सदस्य है | यदि इनके परमाणु द्रव्यानों के क्रम में रखा जाए तो आवर्त सारणी की सम्पूर्ण उपयोगिता ख़त्म हो जाएगी |
  3. मेंडलिव ने कुछ तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में नहीं रखा है जैसे – आर्गन, पोटैशियम, कोबाल्ट निकेल |
  4. कुछ समान तत्वों को अलग-अलग तथा कुछ असमान तत्वों को एक साथ रखा |
  5. आवर्त सारणी में समस्थानिकों के लिए कोई स्थान निश्चित नहीं है |
  6. वर्ग 8 में तीन-तीन तत्वों को रखा लेकिन अन्य वर्गों में दो-दो तत्वों को रखा | 

आधुनिक आवर्त सारणी ( Modern periodic table ) – परमाणु संख्या के आधार पर तत्वों को सजाकर आवर्त सारणी को संशोधिक रूप में प्रस्तुत किया जिसे आधुनिक आवर्त सारणी कहते हैं | आधुनिक आवर्त सारणी में 18 वर्ग तथा 7 आवर्त होते हैं | इन्हें चार ब्लॉक में बॉटा गया है –

  1. s-ब्लॉक – वर्ग 1 या 2 के तत्व s-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं | 
  2. p-ब्लॉक – वर्ग 13 से 18 के तत्व p-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं | 
  3. d-ब्लॉक – वर्ग 3 से 12 के तत्व d-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं | 
  4. f-ब्लॉक – आवर्त सारणी के नीचे लैथेनइड्स के तत्व f-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं | 

वर्ग 1 के तत्व क्षर धातुएँ, वर्ग 2 के तत्व क्षार मृदा धातुएँ, वर्ग 17 के तत्व हैलोजंस और वर्ग 18 के तत्व उत्कृष्ट गैस कहलाते हैं | 

आवर्त सारणी की विशेषताएँ –

         वर्गों की विशेषताएँ

  1. किसी वर्ग विशेष के सभी तत्वों के संयोगी इलेक्ट्रोनों की संख्या समान होती है | 
  2. किसी वर्ग के सभी तत्वों की संयोजकता समान होती है | 
  3. आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे आने पर परमाणुओं का आकार बढ़ते जाता है | 
  4. आवर्त सारणी के किसी वर्ग से ऊपर नीचे आने पर तत्वों की विधुत ॠणात्मकता घटते जाता है | वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर धातुओं की क्रियाशीलता बढ़ती है | 
  5. वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर धातुओं की भौतिक गुण घटते जाता है | लेकिन घनत्व बढ़ते जाता है | 
  6. वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर अधातुओं के भौतिक बढ़ते जाता है | 

       आवर्त की विशेषताएँ – 

  1. किसी में बाये से दाये जाने पर संयोजी इलेक्ट्रोनों की संख्या 1 से 8 तक बढती है | 
  2. आवर्त में बाये से दाये जाने पर हाइड्रोजन के साक्षेप संयोजकता 1 से 4 तक बढती है | फिर 4 से 1 तक घटती जाती है | 
  3. आवर्त में बाये से दाये जाने पर परमाणु का आकार घटते जाता है | 
  4. किसी आवर्त में बाएँ से दाये जाने पर तत्वों के धातुई गुण घटते हैं | 
  5. किसी आवर्त में बाये से दाये जाने पर आयनन ऊर्जा बढ़ते जाती है |
  6. किसी आवर्त में बाये से दाये जाने पर विधुतॠणात्मक गुण बढ़ते जाता है | 

आधुनिक आवर्त सारणी के दोष –

  1. इस आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के लिए स्थान अनिर्णिति है |
  2. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अनुसार हीलियम को वर्ग दो में होना चाहिए | लेकिन  उसे वर्ग 18 में उत्कृष्ट गैसों के साथ रखा गया है | 

 

 

 

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